क्या करुल ऊ पहाड़ जाबेर
क्या करुल आब ऊ पहाड़ जाबेर |
येती घर भतेर पाणिक नल लाग रो
वोति पाणि को सारौल गाड़ जाबेर |
क्या करुल आब ऊ पहाड़ जाबेर ||
गैसक सिलेंडर लै टैम पारि ऐ जांछ
वोति लकड़ को ल्याल वोतुक टाड़ जाबेर |
क्या करुल आब ऊ पहाड़ जाबेर ||
ना खुट तिणन , ना कच्यार लागुन
कमर पीड़ लै भलि छौ आड़ पाबेर |
क्या करुल आब ऊ पहाड़ जाबेर ||
पैदल हिटणम आब घुन दुखनी
पराण नहे जिल ऊ ठाड़ जाबेर |
क्या करुल आब ऊ पहाड़ जाबेर ||
ना सासुक कचकचाट, ना सौरुक रिसाँण
चैन पारि छू पहाड़ बे टाड़ आबेर |
क्या करुल आब ऊ पहाड़ जाबेर ||
चेलि पारि बुढई सासु भूतिणि हबे लाग रे
च्यौल लै नाचुन हरो मसांण लाग बेर |
पूजूंण तो पडौल ऊ पहाड़ जाबेर ||
बकाई हम क्या करुल ऊ पहाड़ जाबेर ||
शब्दार्थ :
सारौल = ढोयेगा
ल्याल = लायेगा
टाड = दूर
तिणन = फटना
कच्यार = कीचड़
हिटणम = चलने में
घुन = घुटने
ठाड़ = चढ़ाई
रिसाँण = गुस्सा होना , डाँटना
मसांण = भूत
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