Saturday, February 18, 2012

The show must go on


The show must go on

If I am there

Or not

Doesn't matter,

Matters a lot.


Doesn't matter

For unknown 

Neither entity

Nor clone.

No feeling

No personal touch

Why to matter

In case such.


Matters a lot 

To dearest one,

Had good time

Lot of fun.

To my parents 

And dear friends,

Carry customs 

And trends.


No can fill 

The vacuous space,

At any cost

In any case.

But any weather

Any zone,

The Show must

Go on.

                        Pravesh 

Thursday, February 16, 2012

सास सास ना रही


सास सास ना रही 


सास सास ना रही 

उतनी भी ख़ास ना रही 

वो रौब न रहा 

बहू को खौफ ना रहा |

न जाने क्या बात  हुई 

कैसे कहानी पलट गई 

सास नरम हो गई 

बहू गरम हो गई 

सास का स्तर गिर गया 

या बहू का सर फिर गया !!

सास के बंद ताने 

बहू के शुरू गाने 

सास भी झूमे 

दोनों साथ में घूमें |

सास हुंकार भरती थी

बहू बिल्ली सी डरती थी

अब बहू जोर से बोले 

तो सास मुँह ना खोले |

कैसे कहानी 

एकदम से टर्न हो गयी !

कहीं ऐसा तो नहीं कि 

सास भी मोडर्न हो गयी !!?

                      प्रवेश  

Monday, February 13, 2012

लिखो.. तो जानें


लिखो.. तो जानें




बहुत सुना है

नाम तुम्हारा 

कोई भी विषय हो 

तुम लिख देते हो 

अकाट्य और कालजयी |

जो लिख दिया 

वो अमर हो गया 

किसी में इतना ज्ञान नहीं 

कि निकाल सके 

कोई मीन मेख 

तुम्हारी रचना में |

कोई प्रश्न ही नहीं उठता 

तर्क - वितर्क का ,

तुमने लिखा और 

पत्थर की लकीर हो गया ,

मैंने सुना है |

मगर 

एक आग्रह है ,

तुम लिखो 

मेरे दिये विषय पर ,

पृष्ठ की सीमा नहीं 

लिखो सहस्त्रपृष्ठीय 

सहस्त्र ग्रन्थ 

किन्तु ध्यान रहे 

कोई ये ना कहे 

कुछ कमी रह गयी |

......विषय .... 

वही चिर परिचित 

...... माँ .........


                        प्रवेश

Friday, February 10, 2012

मेरे सरकार


मेरे सरकार


चेहरे बदल जाते है 

सिंगार  बदल जाते हैं |

दीवारों पर चस्पे 

इश्तहार बदल जाते हैं |


लुभावने वादों की 

घोषणाएँ नहीं बदलती |

उम्मीदें नहीं बदलती 

उम्मीदवार बदल जाते हैं |


योगी - भोगी -वैरागी 

अलग ही रंग में होते हैं |

चुनावी मौसम में सारे 

त्यौहार बदल जाते हैं |


नये रिश्ते उपजते हैं 

पुराने हो चले धूमिल |

पाँच साल में एक बार 

रिश्तेदार बदल जाते हैं |


गाड़ी से हाथ हिलाने वाले 

गिरने लगते हैं पैरों पर |

चुनाव के बखत कैसे 

संस्कार बदल जाते हैं |


चुनाव ख़त्म, गद्दी हासिल 

चारों ओर फिर सूनापन |

पाँच साल के लिये 

मेरे सरकार बदल जाते हैं |


                                  प्रवेश

Tuesday, February 7, 2012

रेत का टीला


रेत का टीला 

बेचारा

रेत का टीला 

तरसता  

अपने अस्तित्व को,

अपने ही जहाँन  में 

निरे रेगिस्तान में |

हवा की मनमानी ,

बेबस 

रेत का टीला 

थोड़ी जिद करे 

जब हो गीला ,

मगर कब तक !!

चुपचाप 

चल देता है  

जहाँ भी ले जाना चाहे 

हवा की एक डाँट 

फिर बन्दर बाँट 

कुछ इधर छितरी 

कुछ उधर 

और रेत का टीला 

रेत में गुम |

फिर चारों ओर

रेत ही रेत 

मगर टीला कहाँ 

सिर्फ रेतीला खेत |

                                     प्रवेश

Friday, February 3, 2012

पाँचसितारा


पाँचसितारा 

श्रीमती जी बोली 

यूँ ही हँसी ठिठोली 

नहीं बना खाना 

आज नया बहाना 

कहीं बाहर चलें 

स्वाद बदलें 

चलो पाँचसितारा 

समझो इशारा 

मैं कुछ ना बोला 

अपनी जेब को तोला

विचार बदल दिये

दोनों चल दिये 

पहुँचे पाँचसितारा 

गौर से निहारा 

बैरे को आदेश दिया 

उसने झट सब पेश किया 

भरपेट खाया 

फिर बिल आया 

वाह रे पाँचसितारे

दिन में दिखे तारे |

                           प्रवेश

Wednesday, January 25, 2012

दादी सठिया गयी हैं


दादी सठिया गयी हैं 

दादी सठिया गयी हैं ...

कहती हैं कि 

प्रवचन का चैनल लगाओ 

या श्वेत -श्याम गाने |

नये गाने मत सुनो

मत देखो  

किसी भी बहाने |

लगता है 

दादी सठिया गयी हैं |


नया फैशन 

नया ज़माना 

दादी क्या जाने |

मेरे पहनावे पर भी 

तंज कसती हैं 

देती हैं ताने |

लगता है 

दादी सठिया गयी हैं |


टोकती हैं 

जब तैंयार होती हूँ 

कहीं बाहर जाने |

बात ना करना 

किसी से 

जो मिले अनजाने |

लगता है 

दादी सठिया गयी हैं |


ना मानूं उनकी 

बात कोई 

लगती हैं खिसियाने |

कहाँ से लाऊँ

कोई गुरु 

दादी को समझाने |

लगता है 

दादी सठिया गयी हैं |

                                 प्रवेश

Saturday, January 21, 2012

ऐसा गीत सुनाओ प्रिये !

ऐसा गीत सुनाओ प्रिये !

एक ऐसा गीत सुनाओ प्रिये
कि सारे तार बजें मन के |
ऐसी धुन और सरगम हो
सारे गीत हों जीवन के |

एक ऐसा गीत सुनाओ प्रिये
कि बहता पानी जाये ठहर |
वक़्त का दरिया थम जाये
रुक जाये ये घड़ी पहर |

एक ऐसा गीत सुनाओ प्रिये
कि लगे झूमने हर डाली |
सूखी शाख हरित हो और
गाये कोयलिया मतवाली |

एक ऐसा गीत सुनाओ प्रिये
कि काले मेघा घिर आयें |
तपती और जलती भू पर
शीतल जल बरसा जायें |

एक ऐसा गीत सुनाओ प्रिये
कि शक्ति मिले हारे मन को |
जोश जगे, उम्मीद बँधे
स्फूर्ति मिले शिथिल तन को |

एक ऐसा गीत सुनाओ प्रिये
फिर मैं कुछ ना सुनना चाहूँ |
माया के मकड़ी जाले
फिर - फिर ना बुनना चाहूँ |

                                       प्रवेश

Friday, January 20, 2012

मेरा दीवानापन अलग है

मेरा दीवानापन अलग है

कभी साथ ही खेला किये खाया किये हम |
अब जवानी की बात है, बचपन अलग है ||

क़यामत तक हमराह बनने की कसम क्या !
कहते नहीं क्यों अब तुम्हारा मन अलग है ||

नजर आये तुम्हे कुछ और ही शीशे में शायद |
अब ये ना कह देना कि ये दरपन अलग है ||

तुम नही हो आज तो तनहा नहीं मैं |
महफ़िलें हैं और सूनापन अलग है ||


दीवाने हैं मगर खुद सा दीवाना समझ ना लेना |
तुम्हारी दीवानगी से मेरा दीवानापन अलग है ||

                                                        प्रवेश 

Tuesday, January 17, 2012

मैंने तारे गिने


मैंने तारे गिने 


मैंने तारे गिने 

बहुत सारे गिने |


शबनम की बरसती 

बूँदें गिनी 

दिल में दहकते

अंगारे गिने 

मैंने तारे गिने |


चाँद के चेहरे पे 

धब्बे गिने 

आसमान के 

किनारे गिने 

मैंने तारे गिने |


बीते  पल 

सुहाने गिने 

आँसू के बहते 

धारे गिने 

मैंने तारे गिने |


बिजली के तार पर

उल्लू गिने 

गली के कुत्ते

आवारे गिने 

मैंने तारे गिने |


हाथ फेरता रहा 

अपने गालों पर 

दाढ़ी के बाल भी 

सारे गिने 

मैंने तारे गिने |


विरह ने मुझे 

गिनती सिखा दी 

देखो प्रिये 

मैंने क्या - क्या गिना !!


सब तुम्हारी यादों के 

सहारे गिने |

मैंने तारे गिने 

बहुत सारे गिने |

                              प्रवेश 

Friday, January 13, 2012

हाइकु - फिर रात गुजरी

हाइकु -फिर रात गुजरी 

सोते तुम्हारी

फिर रात गुजरी

रोते हमारी |


                         प्रवेश 

Thursday, January 12, 2012

Have you seen Him!!

Have you seen Him!!

Have you ever seen Him
Either fat or slim.
What kind of size and shape
A watermelon or a grape.

I never saw but have heard
His grace in flying bird.
His presence in everything
Cattle, creeper, human being.

In flowing river, shining rays
I never saw, my grandma says.
I never saw but have felt
When ice-cream of mine melt.

He is friend of everyone
He can see in trouble none.
It's only by His grace
A turtle can win the race.


                                      Pravesh