तुम्हारी तरह कीचड़ नहीं उछालेंगे
पाक दामन है किसी तरह बचा लेंगे
बिना ही बात के अदावत किये फिरते हो
फिर समझते हो तुम्हें दावत पे बुला लेंगे
तू समझता है जितनी भीड़ है तेरे आगे
सारे मिलकर तुझे कुर्सी दिला देंगे
अभी गुस्से में है तू यार मेरे शाम को मिल
तेरी भी सुन लेंगे और अपनी भी सुना लेंगे | ~ प्रवेश ~
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