Saturday, October 10, 2026

तेरी भी सुन लेंगे और अपनी भी सुना लेंगे

तुम्हारी तरह कीचड़ नहीं उछालेंगे 

पाक दामन है किसी तरह बचा लेंगे 


बिना ही बात के अदावत किये फिरते हो 

फिर समझते हो तुम्हें दावत पे बुला लेंगे 


तू समझता है जितनी भीड़ है तेरे आगे 

सारे मिलकर तुझे कुर्सी दिला देंगे   


अभी गुस्से में है तू यार मेरे शाम को मिल 

तेरी भी सुन लेंगे और अपनी भी सुना लेंगे  |  ~ प्रवेश ~ 

 

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