तुम कहो मैं किस्सा तुम्हारी ज़बानी लिख दूँ।
दो बात कहूँ और सारी कहानी लिख दूँ।
सारा शहर सुबह से खड़ा है कतार में।
आग ही लग जाये जो पानी लिख दूँ।
दो दिन अगर जो ज़िन्दगी के चैन से गुजरें।
तो नाम तेरे चार दिन की जवानी लिख दूँ।
तू साथ हो तो हर दिन खूबसूरत हो।
तू साथ हो तो हर शाम सुहानी लिख दूँ। ~ प्रवेश ~
दो बात कहूँ और सारी कहानी लिख दूँ।
सारा शहर सुबह से खड़ा है कतार में।
आग ही लग जाये जो पानी लिख दूँ।
दो दिन अगर जो ज़िन्दगी के चैन से गुजरें।
तो नाम तेरे चार दिन की जवानी लिख दूँ।
तू साथ हो तो हर दिन खूबसूरत हो।
तू साथ हो तो हर शाम सुहानी लिख दूँ। ~ प्रवेश ~