मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Thursday, February 23, 2012

थोड़ी कड़वाहट


थोड़ी कड़वाहट


स्वर्ण रजत हीरे जड़ित, मखमल सेज सहेजि।

चिरनिद्रा के वास्ते वही काठ की सेजि ।। १ 


नाना प्रसाधन भये , जे रखि रूप निखारि ।

ऐसे ना साधन भये , जे चित्त देइ सुधारि ।। २ 


प्रवेश दुनिया बावली , छूकर मृत नहात ।

अरु जीवित को करि मृत , बड़े चाव से खात ।। ३


सम्बन्ध सकल सवारथी, तकैं काल की राह ।

निकरि आवै शुभ काज तो , करैं टाल की चाह ।। ४


मन पावन नाही किया , वस्त्र गेंहुएं ओढ़ ।

कृत्रिम खाल चढ़ाय ली , असल खाल में कोढ़ ।। ५ 


प्रजा बात करे हक़ की, याद दिलाते लीक ।

राजा चाहे जो करे , सब कानूनन ठीक ।। ६


मात - पिता का मशवरा , समझ न लीजै डाँट । 

ज्यों सुन्दर उद्यान में , बहुत जरूरी  छाँट ।। ७ 


पौंध लगाईं एक ना, जीवनपुर के गाँव ।

आयि दुपहरी जेठ की, कह कित पावै छाँव ? ८


फँसती जाती पंक में , सुरनद करे विलाप ।

नर - नर की खातिर खाई , खोदै अपने आप ।। ९


जलत-जलत वन जल बिना, शाख -पात जल जात ।

भूमि तले जड़ ना जलै, जल मिलि पुनि नव पात ।। १० 


तू - तू करता जो चला, पहुँचा तेरे पास ।

जो मैं - मैं करता चला, खायी गल की फाँस ।। ११


अर्थ - अर्थ का फेर है , अर्थ सगे सब खैर ।

अर्थ सगे आनन्द है , अर्थ सगे ही बैर ।। १२ 


संगत बड़ी कमाल की , असर न  खाली देत ।

एक तोता भजे राम को , दूजा गाली देत ।। १३


कल - कल में कल गया , कल - कल में आज ।

कल में ही कल जायेगा , कल में तख़्त -ओ- ताज ।। १४


जो जी ना हारे कभी, जीना हार पहिराय ।

जीना ऊपर ले चले , जीना नीचे लाय ।।  १५


टुकड़े - टुकड़े करि कथा , कविता लई बनाय |

देखि आप की दुर्दशा , कविता नीर बहाय || 16

हिन्दी - हिन्दी सब कहें , इक पखवाड़े धूम |

शेष साल हिन्दी रहे , अपनों से महरूम ||  17


दे हरि दे हरि जग कहे , हरि की चौखट छाड़ि |

हरि देहरि जो जात है , हरि दे छप्पर फाड़ि || 18


शुद्ध लिखी जो वर्तनी , उच्चारण में जान |

भाव मिले जो चाहिये , रचना को सम्मान || 19

चला नाक के सीध में, पहुँचा हरि के द्वार ।

दाहिन - बाहिन जो चला, माया के बाजार ।। 20

असी बरस की जिंदगी , एक ही पल की मौत ।

दोनों का रिश्ता अहो , ज्यों घरवाली - सौत ।। 21

दीमक बरगद खा गयी , लौह खा गयी जंग ।

ईर्ष्या मन को खा गयी , चिन्ता नयी उमंग ।। 22

नहीं समझ तो ना चले , उपदेशों से काम ।

ज्यों गंजों की दौड़ में , कंघी मिले इनाम ।। 23

राह भले ही हो कठिन , चले चलो चुपचाप ।

मंजिल चूमेगी कदम , शिखर छुओगे आप ।। 24

लक्ष्य रहे निगाह में , मन में हो उल्लास ।

जो चले वो पहुँच गये , ठहरे हुये निराश ।। 25

हरी - हरी दो दिन मिले , नयी गाय को घास ।

तीजे दिन डंडा मिले , चौथे दिन उपवास ।। 26

उमर गयी करते हुये , जमा खर्च की बात ।

जमा किया जिनके लिये , वही मारते लात ।। 27

जैसे आंधी में हवा , लहरों में तूफ़ान ।

जैसे सूरज में चमक , वैसे तन में प्रान ।। 28

मन मलिन मुख चन्द्र सम , अति कुटिल व्यवहार ।

ते ही सुन्दर जगत में , जे मन बसि सुविचार ।। 29

रूप ना देखो मीत का , देखि लियो किरदार ।

बुरी नजर जब भी लगे , काजल देय उतार ।। 30

मैं - मैं करि बकरी मरी , उल्टी छुरी हलाल ।

मैं से ही हो जायगा , बकरी जैसा हाल ।। 31

राजनीति ना है बुरी , बुरे आ पड़े लोग ।

परमारथ को त्यागकर , लक्ष्य हो गया भोग ।। 32

जड़ना हो आरोप तो , हिंदी से शुरुआत ।

और सफाई के बखत , अंग्रेजी में बात ।। 33

दाँत गड़े खट्टा लगे , खाकर आये स्वाद ।

आँवल के लक्षण जैसी , दादी जी की बात ।। 34

सभी फूल ना फल बनें , सब फल ना आहार ।

सभी बीज ना तरु  बनें , सब तरु ना फलदार ।। 35


लिखते - लिखते लिख दिया , नश्वर यह संसार |

प्रेम अमर है सर्वदा , जीवन का यह सार || 36


पानी तू ही प्रेमिका, पानी तू ही सौत |


पानी से ही जिंदगी, पानी से ही मौत || 37


वक्ता ऐसा चाहिए, खींचे सबका ध्यान |

बड़बोलापन ना रहे, बातों में हो ग्यान || 38


खोलन चाहूं दर्द हो, बंद करूँ तो चैन |

कंप्यूटर के सामने , ज्यादा दुखते नैन || 39


चुप रह जाना है कला, चुप रहना इक रोग |

चुप रह जाने के लिये, करें साधना लोग || 40


सही समय पर नींद ले, सही समय पर जाग |

असमय करते काज जो, रहती भागमभाग || 41


अच्छा लगने के लिये, अच्छा कीजे काम |

अच्छा - अच्छा बोलिये, जग में होगा नाम || 42


महँगा जूता पहनकर, ठक- ठक- ठक- ठक जाहि |

नजर धरा पर ना रही, मुँह की ठोकर खाहि || 43


ठण्डी - ठण्डी है हवा, ठण्डा - ठण्डा घाम |

सोते रहते भास्कर, करते अति विश्राम || 44


सुखदायी रजाई है, पीड़ा देत समीर |

पंछी भी नहीं चाहते, सुबह त्यागना नीड़ || 45


                                                 प्रवेश 

6 comments:

  1. प्रवेश दुनिया बावली , छूकर मृत नहात ।
    अरु जीवित को करि मृत , बड़े चाव से खात ।।........कितना सही कहा आपने

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  2. Kaafi Kadve hai yeh Kaante... Kuchh chubhe to hosh aa gaya... Bohot hi umdaa bayaan hai Mahashay !

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  3. bilkul katu saty pravesh ji ....badhhai ho ..!

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  4. :तेंतालीस कहे .......अर्ध-शतक तो पूरा कर ही देते प्रवेश .......बढ़िया :)

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    1. daddu... 23 feb, 2012 se ab tak 43 hain.. ardh shatak bhi ho hi jayega.

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