मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Friday, February 10, 2012

मेरे सरकार


मेरे सरकार


चेहरे बदल जाते है 

सिंगार  बदल जाते हैं |

दीवारों पर चस्पे 

इश्तहार बदल जाते हैं |


लुभावने वादों की 

घोषणाएँ नहीं बदलती |

उम्मीदें नहीं बदलती 

उम्मीदवार बदल जाते हैं |


योगी - भोगी -वैरागी 

अलग ही रंग में होते हैं |

चुनावी मौसम में सारे 

त्यौहार बदल जाते हैं |


नये रिश्ते उपजते हैं 

पुराने हो चले धूमिल |

पाँच साल में एक बार 

रिश्तेदार बदल जाते हैं |


गाड़ी से हाथ हिलाने वाले 

गिरने लगते हैं पैरों पर |

चुनाव के बखत कैसे 

संस्कार बदल जाते हैं |


चुनाव ख़त्म, गद्दी हासिल 

चारों ओर फिर सूनापन |

पाँच साल के लिये 

मेरे सरकार बदल जाते हैं |


                                  प्रवेश

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