मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Friday, April 15, 2011

तेरा दीदार

तेरा दीदार 

तेरी एक झलक पाने को ,
मचल रहे हैं लोग |

दीदार - ए - हुस्न तेरा करने को ,
खास से आम में ,
बदल रहे हैं लोग |

मेरे शहर में तेरी मौजूदगी का चर्चा है ,
बेसबर , घरों से 
निकल रहे हैं लोग |

तेरे दीदार को तक़दीर की मेहर समझें ,
कड़कती धूप में बेताब 
चल रहे हैं लोग |

तेरे दीदार में जब मेरा भी दीदार पाया ,
दिल सुलगने लगे अंगार से ,
जल रहे हैं लोग |

                                         "प्रवेश"

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