Tuesday, January 10, 2012

रिश्तों की डोर


रिश्तों की डोर


ये जो रिश्तों की डोर है 

इधर भी एक छोर है 

उधर भी एक छोर है 

ये जो रिश्तों की डोर है ...


गर विश्वास है , मतैक्य है 

और समझ है आपसी 

तो आनंद की एक सांझ है 

उम्मीद की एक भोर है 

ये जो रिश्तों की डोर है ...


गर पैदा हो जाये 

कोई ग़लतफ़हमी 

और विश्वास उठ जाये तो 

बड़ी नाजुक है , कमजोर है 

ये जो रिश्तों की डोर है ...


"मैं" की गुंजाइश नहीं 

जोर आजमाइश नहीं 

"हम " का गर भाव है 

डोर में बहुत जोर है 

ये जो रिश्तों की डोर है


इधर भी एक छोर है 

उधर भी एक छोर है ....


  प्रवेश

Sunday, January 8, 2012

वाह प्रवेश...!!


वाह प्रवेश...!!


वाह प्रवेश...!!

बड़े कमाल के हो तुम ,

जिसे ना मिलो 

वो अफ़सोस के आँसू बहाये 

और मिल जाओ जिसे 

वो ख़ुशी के आँसू

रोक ना पाये |

वाकई ... 

बड़े कमाल के हो तुम |


   प्रवेश

Wednesday, January 4, 2012

क्या करुल ऊ पहाड़ जाबेर


क्या करुल  ऊ पहाड़ जाबेर 


क्या करुल आब ऊ पहाड़ जाबेर |

येती घर भतेर पाणिक नल लाग रो 

वोति पाणि को सारौल गाड़ जाबेर |

क्या करुल आब ऊ पहाड़ जाबेर ||


गैसक सिलेंडर लै टैम पारि ऐ जांछ 

वोति लकड़ को ल्याल वोतुक टाड़ जाबेर | 

क्या करुल आब ऊ पहाड़ जाबेर ||


ना खुट तिणन , ना कच्यार लागुन  

कमर पीड़ लै भलि छौ आड़ पाबेर |

क्या करुल आब ऊ पहाड़ जाबेर ||


पैदल हिटणम आब घुन दुखनी 

पराण नहे जिल ऊ ठाड़ जाबेर |

क्या करुल आब ऊ पहाड़ जाबेर || 


ना सासुक कचकचाट, ना सौरुक रिसाँण 

चैन पारि छू पहाड़ बे टाड़ आबेर |

क्या करुल आब ऊ पहाड़ जाबेर ||


चेलि पारि बुढई सासु भूतिणि हबे लाग रे  

च्यौल लै नाचुन हरो मसांण लाग बेर |

पूजूंण तो पडौल  ऊ पहाड़ जाबेर ||

बकाई हम क्या करुल  ऊ पहाड़ जाबेर || 


शब्दार्थ :

सारौल = ढोयेगा 

ल्याल = लायेगा 

टाड = दूर 

तिणन = फटना 

कच्यार = कीचड़ 

हिटणम = चलने में 

घुन = घुटने 

ठाड़ = चढ़ाई 

रिसाँण = गुस्सा होना , डाँटना 

मसांण  = भूत 

                               प्रवेश

Monday, January 2, 2012

चुनावी भोंपू


चुनावी भोंपू 


पाँच साल बाद 

फिर से ये भोंपू की आवाज ..

आज भी

उतनी  ही मधुर है ..

पार्टी का नाम लेकर 

विजयी बनायें ,

विजयी बनायें के नारे 

कितने प्यारे 

और मधुर स्वर में 

वातावरण में गुंजायमान हो रहे हैं ...

धीमे स्वर में 

पिछली चूकों पर माफ़ी 

और नये वादों की सूची 

पढ़ी जा रही है 

बड़े अपनेपन के साथ |

ये ढोर - डंगरों की तरह 

खदेड़ कर लायी गयी

भोली जनता ,

जो ताली बजा रही है 

हर वाक्य के अंत में ,

बड़ी धैर्यवान है 

और आशावान भी |

ये माफ़ कर चुकी है 

पुराने गुनाह 

और

आज के वादों की

सच्चाई भी बखूबी जानती है ..

फिर भी शोर तो सुनिये 

करतल ध्वनि का ...


                       प्रवेश

Thursday, December 29, 2011

जज्बा जरुरी है


जज्बा जरुरी है 


हाथ पर न हाथ धर देखो जमाने को 

मशाल तो बदलाव की लहू से जलती है |


सौ बार गिर जाओ मगर हिम्मत नहीं हारो 

दुनिया तो हिम्मत वालों के क़दमों पे चलती है |


जज्बा नहीं जिनमे कि कुछ कर के गुजर जायें 

दिन ख्वाबों में कटता है , शाम ख्वाबों में ढलती है |


उतर जाते हैं जो मैदान में , बाँधे कफ़न सर पर 

संग उनके हमेशा जिंदगी और मौत टहलती है |


खूबसूरती तारीफ का मुद्दा नहीं यारो 

तारीफ खुशदिल लोगो की दिल से निकलती है |


                                              "प्रवेश " 

Wednesday, December 28, 2011

हाइकु -छत्तीस गुण


छत्तीस गुण 



छत्तीस गुण 

मेल खाती कुण्डली 

फिर तलाक |


                        "प्रवेश " 

Tuesday, December 27, 2011

प्यारी सी मुस्कान


प्यारी सी मुस्कान

कीमत क्या इसकी, तू जान भी ले लेना 

बदले में प्यारी सी मुस्कान देना |


बड़े काले चेहरे नकाबों में फिरते 

गैरों में अपनों को पहचान लेना |


पीछे हटें न कदम बढ़ जो जाएँ 

आगे ही बढ़ना है , ये ठान लेना |


मेहनत तुम्हारी और रहमत खुदा की 

किसी का न सर पे तू  अहसान लेना |


यकीं ना रहे जब दुआओं पे खुद की 

तो आकर मेरा हाल भी जान लेना |


                                        "प्रवेश " 

Monday, December 26, 2011

हाइकु - घना कोहरा


हाइकु - घना कोहरा




                                            ठण्डा अलाव 

                                             सिसकते बदन 

                                             घना कोहरा |


                                                                               "प्रवेश " 

Saturday, December 24, 2011

हाइकु -मासूम बच्चा


हाइकु-मासूम बच्चा




वजनी बस्ता 

अपार अपेक्षायें 

मासूम बच्चा |


                "प्रवेश " 

Tuesday, December 20, 2011

हाइकु - दहेज़


हाइकु - दहेज़ 


पीला रंग ही 

हाथ रंगने हेतु 

काफी  नहीं  है |


घुलता नहीं 

खून पसीने बिन 

ये रंग यारो |


दहेज़ लेते 

पढ़े - लिखे गँवार 

झिझके  बिन |


अमीर खुश 

गरीब ही बेहाल 

औ तंग यारो |


                 "प्रवेश " 

Monday, December 19, 2011

हाइकु -माँ और मोटरसाइकिल


हाइकु -माँ और मोटरसाइकिल




एक हफ्ते से 

बिस्तर पर पड़ी 

खाँसती माता |


न दवा दारू 

मीठे बोल भी नहीं 

वक़्त न मिला |


थोड़ी आवाज 

मोटरसाइकिल 

करने लगी |


उसी पल ही 

ठीक करवा लाये 

मैकेनिक  से |

                             "प्रवेश "

Wednesday, December 14, 2011

हाइकु - तुम्हारी अदा


हाइकु - तुम्हारी अदा


वो चल देना 

जुल्फें झटककर 

तुम्हारी अदा |


टेढ़ी मुस्कान 

सुर्ख अधरों पर

तुम्हारी अदा |


नागिन चोटी 

बलखाती कमर

तुम्हारी अदा |


वो चंचलता 

बिखराती नजर 

तुम्हारी अदा |


पलटकर 

कभी देखो इधर 

कर लो  खता |


कभी दिल में 

देखो उतरकर 

हमारी अदा |

                          "प्रवेश "

Monday, December 12, 2011

हाइकु - सर्दी की सुबह


हाइकु - सर्दी की सुबह 



कँपाती भोर 

ठिठुरता सूरज 

सिकुड़ा हुआ |


हटा कोहरा 

चमकती किरणें 

शीतल घाम |


आधी नींद से 

जग उठी दुनिया 

अंगडाई सी |


                            "प्रवेश "