मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Saturday, September 1, 2012

उधारी


उधारी

तीन रुपये की
उधारी करके
टेप खरीदी थी
पाँच का नोट
चिपकाने के लिये ,
फिर वही फटा नोट चिपकाकर
उधारी चुकाई थी
और टॉफी खरीदी थी
तुम्हारे लिये
बचे हुये दो रुपयों से,
शायद तुम्हें याद हो |
खैर ! तुम्हें याद हो न हो
मुझे याद है
जिंदगी मे पहली बार
उधारी जो की थी |

                 " प्रवेश "

4 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा आज रविवार (2-09-2012) के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    सूचनार्थ!

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    1. रचना को सराहने और चर्चामंच में स्थान देने के लिये आपका आभारी हूँ श्रीमान

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  2. अच्छी है !

    वर्ड वेरिफिकेशन हटा दें तो टिप्पणी देना आसान हो जाये !

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    1. शुक्रिया मित्रवर...वर्ड वेरिफिकेशन हटा दिया गया है|

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