मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Monday, September 5, 2011

शिक्षक

शिक्षक 

जान फूँक दे पत्थर में 
और जड़ को चेतन कर दे |
सच्ची राह दिखाकर वो 
निश्छल , निर्मल मन कर दे |

हों अगर निराश कभी 
वो फिर से आस जगाता है |
पस्त होते हौंसलों में 
आत्मविश्वास जगाता है |

स्नेहमय ह्रदय कभी है .
कभी कठोर व्यव्हार भी |
दण्डित भी करता है वही ,
देता है अगणित प्यार भी |

मानवता का परम मित्र 
धर्म का सच्चा रक्षक है |
भगवान  से भी ऊँचा दर्जा 
मिलता है जिसे वो शिक्षक है |

केवल पुस्तक पढ़ाने  वाला 
महज एक अध्यापक है |
जीने की कला सिखाने वाला ,
सच्चे अर्थों में शिक्षक है |

                                  "प्रवेश "

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