मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Thursday, December 30, 2010

नया साल

नया साल 

यूं तो इस रस्म को 
चलते जमाना  हो गया  ,
पंचांग फिर गतवर्ष का 
देखो पुराना हो गया |
जो घटित होना था ,
कुछ घटा, कुछ ना घटा  ,
कुछ  घट गया ऐसा ,
जिसे मुश्किल जुड़ाना हो गया |
हर मजहब ,हर जाति का 
त्यौहार है यह नववर्ष  ,
आज तो हर कौम का 
जलसा सालाना हो गया |
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खुशहाल सब जन हो यहाँ ,
फैले लहर बस हर्ष की ,
सम्पूर्ण मानव जाति को 
शुभकामना नववर्ष की  |
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                                                              प्रवेश

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