मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Friday, December 24, 2010

पहाड़ी

पहाड़ी 

एक बार मेरे मित्र  को 
एक सज्जन ने कह  दिया  पहाड़ी,
मित्र था गबरू   जवान  
फितरत से  थोडा  अनाड़ी |
चढ़ गया बोरा बिस्तर लेकर 
सज्जन की शामत आई
सज्जन मुझसे बोले 
इनसे हमें बचाओ भाई |
मैंने मित्र से कहा बंधुवर 
सज्जन पर  क्यों  बिगड़ते  हो,
इस छोटी सी बात पर 
क्या  तुम  हर  किसी  से लड़ते  हो?
मित्र बोले ये  अगर पहाड़ी
तुमको कह दे तो क्या  हो?
मैं बोला तो इस से अच्छा 
तुम ही बताओ और क्या हो?
हर तूफ़ान से टकरा जाये 
उसको पहाड़ी कहते   हैं,
हर किसी  के  काम  आये 
उसको पहाड़ी कहते हैं |
हर मुसीबत झेल जाये 
उसको पहाड़ी कहते हैं ,
मौत से भी खेल जाये 
उसको पहाड़ी कहते हैं |
कष्ट में भी घबराये 
उसको पहाड़ी कहते हैं ,
दर्द में भी जो मुस्काये 
उसको पहाड़ी कहते हैं |
धैर्य से जो काम ले 
उसको पहाड़ी कहते हैं ,
जी  चुराये  काम  से 
उसको पहाड़ी कहते हैं |
पहाड़ी का मतलब 
मित्र की समझ में गया,
सज्जन का पहाड़ी कहना 
भी उसको भा गया |
मित्र बोला आज  से पहले 
मैं था थोडा अनाड़ी ,
आज मुझको गर्व है        
जानकर कि मैं पहाड़ी |
                   प्रवेश 

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