मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Friday, January 4, 2013

बेझिझक दे दो , सोचते क्यों हो !

बेझिझक दे दो , सोचते क्यों हो !
खरीदारों को दिल बेचते क्यों हो !!

क्यों हाथ - पाँव फूलते हैं , नजरें मिलाने से !
बहने दो पसीना , पोंछते क्यों हो !!


ये लेन - देन दिलों का वक़्त पर कर लेते ।
इस उम्र में बालों को नोंचते क्यों हो !!

जिस्म पर ही जोर चलता है उम्र का ।
बेवजह बुढ़ापे को कोसते क्यों हो !!
                                         " प्रवेश "

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