मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Thursday, January 3, 2013

किसी को आज की , किसी को कल की फिकर

किसी को आज की , किसी को कल की फिकर ।
किसी को झोंपड़ी , किसी को महल की फिकर ।।

किसी को चोरी पकड़े जाने का डर है ।
किसी को लिखी हुई ग़ज़ल की फिकर ।।

फूल बरसात ने झाड़े , कुछ फल ओलों ने ।
जो अकेला बचा है , उस फल की फिकर ।।

कोई फिकरमंद है अंजामे - मोहब्बत लेकर ।
किसी को इजहारे - पहल की फिकर ।।

किसी काम से मेरी बेटी घर से निकली है ।
घर लौटने तक सलामत सफ़र की फिकर ।।

छोटा बच्चा भी अब इस्कूल जाने लायक है ।
कागज , सियाही और हर पल की फिकर ।।

मद्धिम धूप की आगोश में दिन गुजर गया ।
शाम ढलते ही रजाई - कम्बल की फिकर ।।

यूं मेरी बात है घोषणापत्रों में - सभाओं में ।
असल फिकर तो हाथ और कमल की फिकर ।।

बड़े बेटे की शादी कर ली , नौकरी भी है ।
अभी बाकी है अतुल - विमल की फिकर ।।
                                                 " प्रवेश "


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