Monday, September 9, 2019

चुनाव

आईने के सामने 
अभ्यास चल रहा है

कैसे छिपाना है 
चेहरे का ताव ।
कैसे लाना है 
सेवक का भाव ।
कैसे बदला जाए 
बोलने का ढंग ।
कैसे चढ़ाया जाए 
हमदर्दी का रंग ।

लगाया जा रहा है हिसाब

किसके सामने 
कितना झुका जाय ।
किसके घर पर 
कितना रुका जाय ।
कौन मान जायेगा 
चुपड़ी बात से ।
कौन अपना लेगा 
केवल जात से ।

किसको नोट देने हैं
किसकी कमजोरी दारू है ।
कौन अपना होकर भी
धोखा देने को उतारू है ।

अपनी गरज पर गधे को भी
पिता कहना उनका स्वभाव है ।
इस सारे नाटक का कारण
आने वाला चुनाव है। ~प्रवेश~

No comments:

Post a Comment