मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Thursday, May 2, 2013

तुमसे यारी हुई

तुमसे यारी हुई
बहुत उधारी हुई ।

जाने कितनों से पंगा लिया
कितनों से मारामारी हुई ।

बहुतों को सीने में दर्द हुआ
बहुतों को दिल की बीमारी हुई ।

गली - गली लेनदार हो गये
पहले न इतनी देनदारी हुई ।

आसमां पर तुम्हारे नखरे गये
जमीं पर मेरी जमींदारी हुई ।
                                   " प्रवेश "

1 comment:

  1. बढ़िया प्रस्तुति!
    डैश बोर्ड पर पाता हूँ आपकी रचना, अनुशरण कर ब्लॉग को
    अनुशरण कर मेरे ब्लॉग को अनुभव करे मेरी अनुभूति को
    lateast post मैं कौन हूँ ?
    latest post परम्परा

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