मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Friday, February 8, 2013

तुम जात पूछते हो !

जाने किस मुँह से तुम ये
गिरी हुई बात पूछते हो !
वो कुर्बान हुआ है देश पर ,
तुम जात पूछते हो !

वो लड़ा देश की आन की खातिर ,
भारत के स्वाभिमान के खातिर ,
तुझ जैसे नादान की खातिर ,
इन्सान है,  इन्सान की खातिर |
वो खेल गया है जान पर ,
तुम शह - मात पूछते हो !
वो कुर्बान हुआ है देश पर ,
तुम जात पूछते हो !

बचा गया डूबती लुटिया
रस्ता  देख रही है बिटिया ,
टूटी  - फूटी जर्जर कुटिया ,
बूढ़े बाबा , माता बुढ़िया |
विधवा वधू की आँखों से
बरसात पूछते हो !
वो कुर्बान हुआ है देश पर ,
तुम जात पूछते हो !

सरहद पर मरने वाला
ना हिन्दू - मुस्लिम - सिख - इसाई ,
भारत माँ का बेटा है वह
हर भारतवासी का भाई |
तुम चर्चा में रहने के लिये
घटिया बात पूछते हो !
वो कुर्बान हुआ है देश पर ,
तुम जात पूछते हो !

                    " प्रवेश "











1 comment:

  1. सही लिखा ...जात पूछकर कितना खुश होते हो..

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