मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Wednesday, August 9, 2017

भेड़िये आ गए हैं

सँभालो बेटियाँ कि भेड़िये आ गए हैं।
नोंच डालेंगे बोटियाँ कि भेड़िये आ गए हैं।

कितनी लम्बी हो कुर्ती, कितना लम्बा हो दुपट्टा
कितना लम्बा घूंघट हो, बताने भेड़िये आ गए हैं।

कब जाना है दफ़्तर, कब आना है वापस
कब निकलना है घर से, बताने भेड़िये आ गए हैं।

कितनी उठानी है नज़र, कितनी झुकानी है नज़र
कितनी मिलानी है नज़र, बताने भेड़िये आ गए हैं।

क्यों डरेंगीं बेटियाँ अगर भेड़िये आ गए हैं
डटकर लड़ेंगीं बेटियाँ अगर भेड़िये आ गए हैं। ~ प्रवेश ~

2 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (11-08-2017) को "हम तुम्हें हाल-ए-दिल सुनाएँगे" (चर्चा अंक 2693) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. धन्यवाद् महोदय | चर्चामंच पर स्थान पाना किसी भी रचनाकार के लिए सम्माननीय है | आपका हार्दिक आभार |

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