मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Monday, July 30, 2012

स्कूलों की भरमार


स्कूलों की भरमार

मेरे शहर में स्कूलों की भरमार है ।

पनवाड़ी की दुकान सी 

दो इस गली में , दो उस गली में 

एक सड़क के इस पार है 

एक सड़क के उस पार है ।

अजी गजब हो गया 

स्कूलों की भरमार है ।

शायद आपके शहर में भी हो ।

बारहवीं पास करो 

और मास्टर बन जाओ 

मगर नौकरी की  एक शर्त है 

घर - घर जाओ 

बच्चे लाओ ।

एडमिशन कराओ 

और नौकरी पर आ जाओ ।

जून की छुट्टियों में 

फेरीवालों की तरह घूमते हैं 

अपने स्कूल की खूबियाँ बताते हैं 

जैसे अचार बेचने वाला 

खूबियाँ बताता है 

अलग - अलग तरह के अचार की

अलग - अलग खूबियाँ  ।

ऑफर दिये जाते हैं 

आम के अचार के साथ 

करोंदे का अचार मुफ्त ,

दो बच्चों को भेजेंगे तो 

एक की आधी फीस लगेगी ।

अब आप ही बताइये 

ऑफर ठुकराये थोड़े ही जाते हैं ।          "प्रवेश "

                                     

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