मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Monday, July 16, 2012

निशानेबाज

निशानेबाज 


बड़े कमाल के निशानेबाज हो 
एक ही बार में मार गिराया
चूजों से वादा करके आये पंछी को ।

तुम्हें भूख नजर आती है
केवल अपने बच्चों की ।

एक वक़्त के खाने के लिये 
तुमने एक ही पंछी नहीं मारा,
अनजाने ही सही
तुमने एक परिवार तबाह कर डाला ।

दम तोड़ देंगे एक - एक कर
माँ की बाट जोहते सभी चूजे ।

तुम नहीं देख सकते हो
भूख से बिलखते बच्चे ।

बहुत प्यार है तुम्हें बच्चों से ,
केवल अपने बच्चों से ।


                             "प्रवेश"


2 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि-
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार (17-07-2012) को चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  2. चूजों पर तरस आ रहा है
    निशानेबाजों को समझा रहा है
    उनके अपने बच्चों को उन्हें दिखा कर
    मुर्गियों को बचा रहा है
    प्रवेश एक अच्छी कविता बना रहा है ।

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