मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Monday, June 12, 2017

बिजली - पानी - सड़क नहीं है

बिजली - पानी - सड़क नहीं है
नेताजी को फरक नहीं है |

इनका घर है स्वर्ग से सुन्दर
गाँव सा कोई नरक नहीं है | *

तब बोतल - नोटों में बिक गयी
जनता अब क्यों भड़क रही है |

खून नसों में पानी हो गया
छाती फिर भी धड़क रही है |

धूल झोंकने फिर आयेंगे
बायीं वाली फड़क रही है |

इनसे करे सवाल जो कोई
बन्दा ऐसा कड़क नहीं है | ~ प्रवेश ~

 *गाँव सा कोई नरक नहीं है = दूरस्थ गाँव जो
आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं | 

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