मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Thursday, September 17, 2015

आओ मिलकर गाली दें

नल की टोंटी हुई ख़राब
पानी जाये बेकार
इस बरबादी के लिये
जिम्मेदार सरकार ।

आओ मिलकर गाली दें ।

कूड़ा फेंकें सड़क पर
बड़े - बड़े होशियार
फिर चिल्लायें लग गया
कूड़े का अंबार ।

आओ मिलकर गाली दें ।

शीश-कवच पहना नहीं
आ गये टाँके चार
सिर फट जाने के लिये
जिम्मेदार सरकार ।

आओ मिलकर गाली दें ।

दाएँ - बाएँ देखकर
सड़क नहीं की पार
अनचाहा एक हादसा
कर गयी मोटरकार ।

आओ मिलकर गाली दें ।

जल्दी - जल्दी के लिये
घूस खिलाते यार
काम निकलते ही कहें
हो गया भ्रष्टाचार ।

आओ मिलकर गाली दें ।

घात लगाये बैठे हैं
कुत्ते - गिद्ध - सियार
घर से जिनको नहीं मिले
कभी भले संस्कार ।

आओ मिलकर गाली दें । ~ प्रवेश ~ 

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