मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Tuesday, December 31, 2013

मेरी माँ पढ़ लेती है मुझे

तुमने बाँचा है मुझे
मुझसे अलग होने पर ,
कभी मुझे 
मुझमें ही नहीं पढ़ पाये हो ,
तुमने इंतजार किया है 
मेरे छपने का
लिखे जाने का ,
पढ़े - लिखे हो 
लिखा पढ़ सकते हो 
वो भी उसी भाषा में 
जो तुमने पढ़ी है
पढ़ने के लिये |
मेरी माँ पढ़ लेती है मुझे
टेलीफोन पर ही ,
मेरा मौन भी
सही - सही उच्चरित कर लेती है ,
साक्षरों में शामिल नहीं है फिर भी,
लिखा जो नहीं पढ़ पाती | ~ प्रवेश ~

1 comment:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    गये साल को है प्रणाम!
    है नये साल का अभिनन्दन।।
    लाया हूँ स्वागत करने को
    थाली में कुछ अक्षत-चन्दन।।
    है नये साल का अभिनन्दन।।...
    --
    नवल वर्ष 2014 की हार्दिक शुभकामनाएँ।

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