मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Sunday, July 9, 2017

गुरु बहुत हैं

गुरु बहुत मिले
मध्यांतर में ताश खेलने चले जाने वाले
हारकर आये तो बच्चों की धुनाई
जीत गए तो तुन के तले चटाई बिछाकर सो जाना
अ आ इ ई तो सिखाया ही

छोटी सी गलती पर पत्थर ढुलवाना
ताकि बनाया जा सके विद्यालय का मैदान
जहाँ आराम से खड़े हो सकें सभी बच्चे प्रार्थना के लिए
खेल सकें कूद सकें , कसरत कर सकें
तबादले के बाद भी वो मैदान वहीँ है
अंग्रेजी पढ़ना - लिखना तो सिखाया ही

छात्रों से खैनी, गुटखा, बीड़ी - सिगरेट मँगाना 
सरेबाजार उनके साथ ताश पत्ते पीटना
साँझ ढले साथ में दावत उड़ाना
किसी की बेटी - बहू छेड़ना और जूते खाना
विषयों का ज्ञान तो कराया ही 

घंटा बजते ही कक्षा में चले आना
विषय से हटना नहीं, कुछ भी रटना नहीं
जो समझ लोगे तो समझ जाओगे
रटोगे तो पछताओगे
भौतिकी क्या खूब समझायी

क्रोध नहीं करना, बेवजह नहीं डरना
बात समझे बिना जवाब नहीं देना
पीछे नहीं मुड़ना, बेपर नहीं उड़ना
कंप्यूटर तो सिखाया ही

सीखना आज भी जारी है
क्योंकि गुरु बहुत हैं | ~ प्रवेश ~


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