मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Thursday, June 1, 2017

बात जरा सी है

मान भी जा नादाँ, बात जरा सी है।
तू भी जानता है तेरी औकात जरा सी है।।

अरसा हुआ, जमीं में दरारें पड़ गयीं।
प्यास बड़ी है, ये बरसात जरा सी है।।

कभी हाथ बढ़ा, कभी हाथ मिला।
न सोच कि ये दोस्ती की सौगात जरा सी है।।

अमन, चैन, खुशियों भरी भोर आयेगी।
सो न जाना गहरे, अब रात जरा सी है।। ~ प्रवेश ~

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