मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Tuesday, December 6, 2016

ऐ सड़क !

ये सड़क जो जा रही है
शहर से गाँव
इसे ढोना था विकास
ताकि थकें ना पाँव ।
ये लाती है गाँव से
लुभाकर जवान
छोड़ देती है शहर में
हैरान - परेशान
वहाँ बंजर होते हैं खेत
गाँव वीरान
छूट जाते हैं पीछे
बेबस - असहाय
इसी सड़क को तो लगेगी
बुजुर्गों की हाय
जिन युवाओं को शहर लाकर
छोड़ देती है
गाँव से उनका सम्बन्ध ही
तोड़ देती है
ऐ सड़क !
तुझे है मेरी राय
तुझे नहीं लगेगी हाय
जो तू एक काम कर जाय
जैसे गाँव से जनता लाय
वैसे वापस भी पहुँचाय। ~ प्रवेश ~