मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Friday, February 12, 2016

चुनाव आ गया है

मुझको देखते ही रुक गया वो
दुआ सलाम करने झुक गया वो
जो  कुछ भी मुझे नहीं मानता था
जो मेरा नाम तक ना जानता  था
मुझे कहने लगा कैसे हो भाई
सड़क गन्दी है या होती सफाई
क्या पानी रोज नल में आ रहा है
मुझे बच्चा समझ समझा रहा है
मैं भी चुपचाप सुनता जा रहा हूँ
माथे पर सलवटें ला रहा हूँ
कैसे पूछे ये मेरा हाल देखो
बदली- बदली है इसकी चाल देखो
इसके चेहरे पे दीन  भाव आ गया है
चुनाव आ गया है - चुनाव आ गया है । ~ प्रवेश ~