मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Friday, March 27, 2015

तुकबंदी जरूरी है ।

ये ना समझें मजबूरी है,
तुकबंदी जरूरी है ।
आ से आ तुक मिले न मिले
ई से ई भी भले न मिले
किन्तु मिले तुक भावों का
मिले तुक अनुभावों का ।
बात बेतुकी कौन सराहे
कोई सुनना तक न चाहे,
कभी किसी को कहो बेतुका
उसी समय हो धक्का मुक्का । 
तुक मिले ही रचना पूरी है,
तुकबंदी जरूरी है । ~ प्रवेश ~

Tuesday, March 17, 2015

बहती कविता

आइये रचें
बहती हुई कविता
जो आकार ले ले उसी बर्तन का
जिसमें भरना चाहो आप ।
साथ ही बचें
अति बौद्धिकता और अतिवादिता से |
भीगने दो कम्बल, बरसने दो पानी ,
पेड़ों से मछलियों को उतार दो
पानी में आग नहीं लगी है । ~ प्रवेश ~