मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Tuesday, February 3, 2015

अख़बार पढ़ रहा हूँ

एक लड़के का स्टाइल लड़की को भा रहा है
लड़का खास किस्म का पान मसाला खा रहा है ।
थोड़ी आगे जाकर राशिफल लिखा है
दोस्तों के हाथों मेरा क़त्ल लिखा है ।
बड़ा सा विज्ञापन है, बाल लम्बे - लम्बे हैं
देखने वालों को खूब ही अचम्भे हैं ।
वैवाहिकी में छपे डेढ़ सौ कुँआरे हैं
सर्वगुण सम्पन्न सारे  के सारे हैं ।
मौत सबको आती है, हल्की सी दस्तक है
आज आठ लोगों की तीये की बैठक है ।
एक चित्र केशी है, एक चित्र टकला  है
तेल बहुत सस्ता है, कुछ न कुछ तो घपला है ।
बेरोजगार लोगों का एक अलग पन्ना है
काम खूब करना है, दाम थोड़ा मिलना है ।
गोलियाँ छपी हैं , मर्दानगी बढ़ाने को
दूध कैसे लायेंगे , गोलियों को खाने को !
कहीं एक कोने में बलात्कार की खबर है
दो ही लाइनों में भ्रष्टाचार की खबर है ।
कहीं किसी छक्के पे कोटि - कोटि वारे हैं
कहीं बुलंद सितारों के गर्दिश में सितारे हैं ।
आप ये न सोचें कि यूं ही गढ़ रहा हूँ ।
सच कह रहा हूँ, अख़बार पढ़ रहा हूँ । ~ प्रवेश ~