मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Friday, September 5, 2014

किस - किस को नमन करूँ

किस - किस को नमन करूँ
क्यों ना सबको नमन करूँ

माता की उँगली  पकड़कर
धरती पर पग धरना सीखा
और पिता की पकड़ कलाई
स्वछन्द विचरना सीखा

फल की लदी डालियों से
परहित में झुक जाना सीखा
जिस पत्थर ने ठोकर दी
उस पत्थर से रुक जाना सीखा

सागर से सीखा है मैंने
बिना भेद सबको अपनाना
नदियों ने सिखलाया मुझको
सदा निरंतर बहते जाना

चंदा सिखलाता है हम को
सब पर शीतलता बरसाना
सूरज शिक्षा देता  हमको
अंधकार को दूर भगाना

विकट परिस्थिति में खुश रहना
सीखा है मैंने फूलों से
अपनी भूलों से भी सीखा
सीखा औरों की भूलों से

मैं जब पथिक  हो जाता हूँ
सब मार्गदर्शक हो जाते हैं
मैं जब शिष्य बन जाता हूँ
सब तब शिक्षक हो जाते हैं

किस - किस को नमन करूँ
क्यों ना सबको नमन करूँ  । ~ प्रवेश ~ 

3 comments:

  1. शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।

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    1. नमस्कार श्रीमान .. आपको भी शिक्षक दिवस की हार्दिक बधाइयाँ एवं शुभकामनायें

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