मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Friday, September 19, 2014

हर बूँद कीमती होती है

हर बूँद कीमती होती है
जब खून पसीना होता है

जी - जी कर मरना होता है
मर - मर के जीना होता है

पल - पल मुश्किल से कटता है
दिन एक महीना होता है

आवाज दफ़न हो जाती है
अश्कों को पीना होता है

वो गलत, गलत नहीं होते
तू  सही, सही ना होता है

सोचो तनिक विचार करो
ये भी कोई जीना होता है ! ~ प्रवेश ~

Tuesday, September 16, 2014

बदलाव

बदलाव के बिना
विकास की यात्रा अधूरी है
आगे बढ़ने के लिए
बदलाव जरूरी है
मगर आज भी बड़ी भूख
छोटी आँत में ही बसती है
तारीखें दीवार पर और
सरकार दिल्ली में बदलती है | ~ प्रवेश ~

Friday, September 5, 2014

किस - किस को नमन करूँ

किस - किस को नमन करूँ
क्यों ना सबको नमन करूँ

माता की उँगली  पकड़कर
धरती पर पग धरना सीखा
और पिता की पकड़ कलाई
स्वछन्द विचरना सीखा

फल की लदी डालियों से
परहित में झुक जाना सीखा
जिस पत्थर ने ठोकर दी
उस पत्थर से रुक जाना सीखा

सागर से सीखा है मैंने
बिना भेद सबको अपनाना
नदियों ने सिखलाया मुझको
सदा निरंतर बहते जाना

चंदा सिखलाता है हम को
सब पर शीतलता बरसाना
सूरज शिक्षा देता  हमको
अंधकार को दूर भगाना

विकट परिस्थिति में खुश रहना
सीखा है मैंने फूलों से
अपनी भूलों से भी सीखा
सीखा औरों की भूलों से

मैं जब पथिक  हो जाता हूँ
सब मार्गदर्शक हो जाते हैं
मैं जब शिष्य बन जाता हूँ
सब तब शिक्षक हो जाते हैं

किस - किस को नमन करूँ
क्यों ना सबको नमन करूँ  । ~ प्रवेश ~