मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Monday, June 2, 2014

चोटी का आम

अनाड़ी के पत्थर की पहुँच से दूर 
पेड़ की चोटी पर लगा आम 
जिस तक पहुँच नहीं सकती 
किसी तोते की चोंच भी ,
किसी दिन पके या न पके 
जब झड़ेगा तो 
कीड़े पड़ चुके होंगे ,
तब तक धन्य हो चुके होंगे 
नीचे लगे आम 
जिन्हें ग्वालों ने खाया 
तोते कुतर गए 
जो पहुँच में थे 
राह चलते बुजुर्गों की लाठी की । 
किसी के काम न आया तो 
अभिशाप सिद्ध होगा 
चोटी पर लगना । 
शीर्षस्थ भी हो तो भी 
सबकी पहुँच में रहो । ~ प्रवेश ~ 

1 comment:

  1. एक अच्छी कविता के लिए बधाई |

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