मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Saturday, May 10, 2014

बुरा करके भला नहीं होता |

कुछ भी बेवजह नहीं होता ।
यूँ कोई बावला नहीं होता ॥

कीकर पर आम नही आते हैं ।
बुरा करके भला नहीं होता ॥

एक पहचान सच्चे यार की है ।
दोस्त कभी दोगला नहीं होता ॥

असर घर से मिली तालीम का है ।
हर कोई मनचला नहीं होता ॥

हारकर मायूस ना हो, हौंसला रख ।
बन्दा चाहे तो क्या नहीं होता ॥

सियासत अब तलक मेरी समझ से ।
यहाँ कोई सगा नहीं होता ॥ ~ प्रवेश ~ 

Thursday, May 1, 2014

गिरगिटी अंदाज़ देखना

या तो हाथ आएगी या कुर्सी छूट जाएगी ।
अब दिन - ब- दिन तुम गिरगिटी अंदाज़ देखना ॥  १

फ़ासला कुर्सी तलक घटने लगा है ।
जनाब का बदला हुआ मिज़ाज देखना ॥ २

चुनाव है इसलिए चूल्हे पर पतीली है ।
फिर गगनचुम्बी टमाटर और प्याज देखना ॥ ३

सड़क पर जो जोश में चिल्ला रही है ।
इसी भीड़ की दबी हुई आवाज़ देखना ॥ ४

इसी मौसम में जिन चूजों के पर निकलेंगे ।
पाँच साल में उन परिंदों की परवाज़ देखना॥ ५ 

सियासत में किसी से कुछ छिपा नहीं रहता ।
उफनते - दफ़नते नये राज़ देखना ॥  ६  ~ प्रवेश  ~