मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Wednesday, December 11, 2013

रेलगाड़ी का जनरल डिब्बा (भाग - 1 )

पूरी तरह विरामावस्था में
नहीं आयी है रेल
और शुरू हो गयी है
चढ़ने वालों की रेलमपेल |

जल्दी में नहीं हैं
उतरने वाले,
उन्हें खयाल है अपने पैरों का
प्रेम है अपने दाँतों से
चढ़ने वाले जोश में हैं
बेखबर हैं इन सब बातों से |

रुक गयी है रेल
रुक गया है जनरल कोच
इस कोच के दरवाजे पर
बड़ी अजीब है सोच |

चढ़ने - उतरने वालों का
हो गया है सामना
अन्दर जाकर सीट मिले
चढ़ने वालों की कामना |

भाई मेरे ! जब अन्दर वाली
भीड़ बाहर आ जायेगी
पाँव रखने लायक जगह तो
ख़ुद - ब - ख़ुद हो जायेगी |
                                         ~ प्रवेश ~

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