मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Monday, October 21, 2013

करवाचौथ का व्रत

दिन भर की भूखी - प्यासी पत्नी

पति के इंतज़ार में

बाट जोहती 

कि कब आये

और व्रत तोड़ दे |

पति लौटा है बदहवाश


नशे में धुत्त 


पार्टी मनाकर


अपने लफंडर दोस्तों के साथ


और लात - घूँसों से


तोड़ दिया है व्रत,


करवाचौथ का व्रत | ~
प्रवेश ~

Friday, October 11, 2013

हाइकु - दौड़ अकेला

दौड़ अकेला
मिलेगी विजयश्री
गुरु ना चेला ||  प्रवेश 

Friday, October 4, 2013

क्या बदल जायेगी सूरत बेवजह चीत्कार से ?
सूरत बदलनी है तो बदलो वोट के हथियार से ।।

बाहर निकालो आस्तीनों में छिपे जो अब तलक ।
साँप कभी पालतू बनते नहीं पुचकार से ॥

बिक जाते हो रंग - बिरंगे कागजों और पानी में ।
अनजान हो तकदीर के निर्माण के अधिकार से ॥

मैं किसी दल के किसी नेता का सम्बन्धी नहीं ।
जागरूक करना चाहता हूँ लेखनी की धार से ॥

फिर से फेंके जायेंगे टुकड़े लुभाने के लिये ।
अभी - अभी पता चला है आज के अखबार से ॥

रहनुमा जो भी चुनो , होशोहवास में चुनो ।
बहस करते हो बहुत मामूली दुकानदार से ॥ ~ प्रवेश ~ 

सिर तुम्हारा - अक्ल तुम्हारी

सिर  तुम्हारा
अक्ल तुम्हारी
मंदिर तुम्हारा  
भगवान तुम्हारा 
मस्जिद तुम्हारी 
खुदा तुम्हारा
मगर अफ़सोस !!!
फिर भी सब कुछ 
माइक - माला वालों के पास 
गिरवी रखे बैठे हो ।  ~ प्रवेश ~