मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Monday, August 12, 2013

भारी होती हैं बेटियाँ

बहुत भारी होती हैं बेटियाँ
बेटा गोद में होता है
कभी कंधे पर भी
सिर पर भी चढ़ जाता है
और बेटी को --
अगर नसीबों वाली है तो,
चलना होता है
उँगली पकड़कर,
गोद में नहीं उठाना है उसे
क्योंकि भारी होती हैं बेटियाँ ।

नौकरी ढूँढ रहा है बेटा
कोशिश तो कर ही रहा है
और कोशिशों में बिता चुका है
पैंतीस बसंत,
फिर भी बोझ नहीं है बेटा ,
बीस की हो गयी है बेटी
उसकी उम्र में
माँ बन गयी थी माँ -- दो बच्चों की,
कोई रिश्ता नहीं आया अब तक
और गली में उसकी उम्र की
कोई है भी तो नहीं,
बोझ बन गयी है बेटी ।

बहुत भारी होती हैं बेटियाँ !! " प्रवेश "
                           

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