मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Tuesday, July 2, 2013

दिल में कुछ अरमान बचाकर रख लो ।

दिल में कुछ अरमान बचाकर रख लो ।
मुट्ठी में तूफ़ान बचाकर रख लो ॥

भूख कहीं सब चावल- चावल ना कर दे ।
दो - एक मुट्ठी धान बचाकर रख लो ॥

माना कि आसानी से बिक जाता है ।
थोड़ा सा ईमान बचाकर रख लो ॥

मुझसे मत पूछो महफूज कहाँ होगी ।
रख पाओ तो जान बचाकर रख लो ॥

दर्द दूसरे  का भी तो महसूस करो ।
पुतले में इंसान बचाकर रख लो ॥

छोड़ो दकियानूस दलीलें मजहब की ।
प्यारे ! हिन्दुस्तान बचाकर रख लो ॥
                                     " प्रवेश "

1 comment:

  1. ह्र्दय की गहराई से निकली अनुभूति रूपी सशक्त रचना

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