मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Monday, May 13, 2013

खाकी से डर लगता है

नदी किनारे घर है
पर तैराकी से  डर लगता है । 

मैखानों का शौक भी है 
और साकी से डर लगता है । 

सिर्फ तुम्ही पर ऐतबार है 
बाकी से डर लगता है । 

शौक नहीं  परदे का 
तांका - झाँकी से डर लगता है । 

जाने दुनिया क्या सोचे !
बेबाकी से डर लगता है । 

दोस्त बताती है खुद को 
पर खाकी से डर लगता है । 
                                  " प्रवेश " 


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