मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Tuesday, April 9, 2013

पानी से खफा सफरी क्यों है !

ये अफरा - तफरी क्यों है !
पानी से खफा सफरी क्यों है !!

कहने और दिखाने को गाँव बहुत प्यारा है ।
ये मिजाज मगर शहरी क्यों है !!

आजादी की रिटायरमेंट की उम्र गयी ।
ये ख़ुशी अब भी सुनहरी क्यों है !!

जनता चीखती है और खामोश हो जाती है ।
ये सरकार निरी बहरी क्यों है !!

दो - दो कदम तो दोनों ही चले थे ।
ये खाई मगर इतनी गहरी क्यों है !!

रूह तो उड़ने को तैंयार है हरदम ।
पुतले में साँस आखिर ठहरी क्यों है !!
                                    " प्रवेश "

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