मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Saturday, March 30, 2013

गाँव से चला जब शहर की तरफ

गाँव से चला जब शहर की तरफ ।
मुड़ - मुड़ देखता रहा घर की तरफ ।।

रुँधा गला पिता का , माँ की नाम आँखें ।
मुझे खींच रही थी मेरे घर की तरफ ।।

जब तक गाड़ी नजर से ओझल न हो गयी ।
बहन हाथ हिलाती रही डगर की तरफ ।।

एक पुरानी सी जो तस्वीर लेकर चला था ।
टाँग दी दीवार पर सर की तरफ ।।

तुझे याद रहा मैं , तुझे भूल गया मैं ।
मैं बढ़ रहा हूँ किस अनजान सफ़र की तरफ ।।
                                            " प्रवेश "

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