मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Saturday, December 29, 2012

आज गम है कि कोई गम नहीं

कल गम था कि गम कम नहीं ।
आज गम है कि कोई गम नहीं ।।

सुधर गया वो सितमगर कैसे !
या ढाने लायक कोई सितम नहीं ।।

दिल वीरां है , हँसी लब पे है ।
ये और बात है  आँख नम नहीं ।।

मुझे यकीं है वो आसान मौत बख्शेगा ।
मेरा महबूब इतना भी बेरहम नहीं ।।

लगता है ज़मीर मर गया शायद ।
ये कैसा खून है , जो खौलकर गरम नहीं ।।

                                          " प्रवेश "

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