मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Friday, December 14, 2012

न दारू न हकीमों की दवा काम आयेगी

न दारू न हकीमों की दवा काम आयेगी

न दारू न हकीमों की दवा काम आयेगी ।
जब भी आयेगी , माँ की दुआ काम आयेगी ।।

अब दिल को शहर की आबोहवा नहीं भाती ।
अब गाँव की ठण्डी हवा काम आयेगी ।।

तेरी बेवफाई का रंज नहीं मुझको ।
जो मैंने की है वो वफ़ा काम आयेगी ।।

भलाई जो भी करी , बेकार नहीं जायेगी ।
अभी ना तो, अगली दफा काम आयेगी  ।।

                                                     " प्रवेश "

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