मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Saturday, November 10, 2012

शुभ दीपावली

शुभ दीपावली 

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गुजरे सालों की तरह फिर से  दिवाली आयेगी ।
फितरतन इस साल भी वैसे ही खाली जायेगी ।।

हावी हो जायेगी त्यौहार पर फिर मुफलिसी ।
बमुश्किल बच्चों की हालत संभाली जायेगी ।।

इस दफा भी बच्चों को बाजार ना ले जाऊँगा ।
सरेबाजार बेवजह इज्जत उछाली जायेगी ।।

हिम्मत नहीं जुटती है थोड़ी उधारी करने की ।
न चुका पाऊँ तो  मेरी बच्ची उठा ली जायेगी ।।

कुछ रौशनी कर लूँगा उपले जलाकर आँगन में ।
कहने को अपनी भी दिवाली मना ली जायेगी ।।

                                                         " प्रवेश "

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