मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Tuesday, October 30, 2012

अब वो जमाना लद गया

अब वो जमाना लद गया 

कुर्सी गयी और पद गया ।
अब वो जमाना लद गया ।।

मधुमक्खियाँ बेघर हो गयीं ।
आँधी में छत्ता - शहद गया ।।

सलाम नहीं करते एहसानमंद भी ।
रुतबा गया और कद गया ।।

भला वक़्त नश्तर चुभोता है दिल पर ।
गुजरा ऐंश गैर के सरहद गया ।।

अब हालत हो गयी परकटे सी ।
परवाज का दायरा बेहद गया ।।

अब वो जमाना लद गया ।।
                                     
                               " प्रवेश "

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