मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Thursday, October 25, 2012

होशियार या हो सियार

होशियार या हो सियार

तुम होशियार या हो सियार !
हो अक्लमंद या मंद अक्ल!

तुम धूप सेंक सकते हो
लेकिन धूप चुरा नहीं सकते ।
तुम उजाड़ सकते हो चंदनवन
पर शीतलता पा नहीं सकते ।

नदी से पानी चुरा लो ,
क्या प्रवाह भी चुरा पाओगे !
तेलरहित दीपक हो तुम
प्रकाश कहाँ से लाओगे !

रे नपुंसको .. बच्चा चुराकर
बाप नहीं बन सकते हो ।
बातें करके बड़ी - बड़ी
प्रताप नहीं बन सकते हो ।

रचना चुरा तो सकते हो ,
रचनात्मकता ला नहीं सकते ।
शेर की जूठन खाकर के
शेर  कहला नहीं सकते ।

तुम होशियार या हो सियार !!
                                         " प्रवेश "

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