मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Friday, October 19, 2012

बेटी की विदाई

बेटी की विदाई 

एक रूह मेरी रूह से पराई हो रही है ।
आज मेरी बेटी की विदाई हो रही है ।।

कुछ अजनबी रिश्ते निभाने जा रही है लाडली ।
कुछ पुराने रिश्तों से रुसवाई हो रही है ।।

तुमको अकेला छोड़कर , बाबा कभी ना जाऊँगी ।
आज खुद के ही वादे से बेवफाई हो रही है ।।

एक आँसू भी सुहाता था ना उसकी आँख में ।
आज दहाड़े मारकर भरपाई हो रही है ।।

प्रेम का प्रसाद हर पल मिले ससुराल में ।
मौजूद हर दिल से , यही दुहाई हो रही है ।।

दहेज़ में ले जा रही है , पुलिंदा तहजीब का ।
डोली में सवार मेरी उम्र की कमाई हो रही है ।।

                                                          " प्रवेश "

4 comments:

  1. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (20-10-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ! नमस्ते जी!

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    1. नमस्कार श्रीमान जी...रचना को मान देने के लिए आपका आभारी हूँ |

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  2. बहुत सुन्दर भावप्रद रचना..
    :-)

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