मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Wednesday, September 26, 2012

कुर्सी और जमीन

कुर्सी और जमीन 

जमीन से उठे
और कुर्सी पर बैठ गये ,
भूल गये 
कि कुर्सी जमीन पर टिकी है 
एकदम समतल जमीन पर ।
कोई सबक भी न लिया 
कुर्सी की फितरत से ,
टिकने   के लिये जरूरी  है 
समतल होना जमीन का ,
चारों पायों का बराबर होना 
और बैठने का सलीका ।
थोड़ी सी भी ऊँच - नीच 
और बेसलीकी 
गिरा सकती है 
ध ....ड़ा ...म्मम्मम से 
फिर उसी जमीन पर 
जिसे भुला दिया था 
कुर्सी मिलने पर ।
                                   "प्रवेश "




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