मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Wednesday, July 18, 2012

किरायेदार हैं


किरायेदार हैं


कौन आया है सदा रहने को यहाँ 

किरायेदार हैं , एक दिन चले जायेंगे ।


न लाये थे कुछ , न ले जायेंगे कुछ 

जब जायेंगे तो हाथ मले जायेंगे ।


बुरे भी नहीं रहेंगे सदा 

बुरे जायेंगे और भले जायेंगे ।


जायेंगे बुरे तो हँसेगी दुनिया 

भलों के पीछे काफिले जायेंगे ।


भले काम ही याद रखती है दुनिया 

बुरे काम पैरों तले जायेंगे ।


इंसानियत को जो करते हैं रौशन 

वो चराग आँधियों में जले जायेंगे ।


                                "  प्रवेश "


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