मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Tuesday, July 3, 2012

छपना चाहते हो !

छपना चाहते हो !

अगर लिखते हो तुम
और छपना जरुरी है ,
तो याद रखो
पहले तपना जरुरी है ।

निश्चय कर लो
कहाँ छपना चाहते हो
कागज़ पर
या दिलों पर !

जहाँ भी छपना चाहो
शर्त एक ही है
जब तपोगे
तब ही छपोगे ।

जो तप गये
वो छप गये
जो तपे नहीं
वही छपे नहीं ।

जब तप जायेगी कलम 
और तुम भी तप जाओगे
तो दोनों जगह
खुद -ब - खुद छप जाओगे ।

                               "प्रवेश "

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