मेरा गद्य ब्लॉग - सोच विचार

Wednesday, June 13, 2012

नशामुक्त परिवार

नशामुक्त परिवार 

बिगड़े हालातों में कहीं सुधार ढूँढने निकला हूँ ।
मैं गाँव में एक नशामुक्त परिवार ढूँढने निकला हूँ ।।

करे परहेज , ना दे और ना ही ले दहेज़
लड़े बुराई से , ऐसा एक यार ढूँढने निकला हूँ ।

मेरे घर ना माँगे , अपने घर ना पूछे शराब
हो अगर कोई, मैं ऐसा रिश्तेदार ढूँढने निकला हूँ ।

बेख़बर पड़ोसी रहते हैं , प्रेमभाव गायब सा है 
नफरत से सजी दुकानों में, मैं प्यार ढूँढने निकला हूँ ।

है दूर बहुत साहिल मगर , हौंसला भी मैं हारा नहीं
मँझधार में डगमग कश्ती की पतवार ढूँढने निकला हूँ ।

पहले भी मैं ढूँढा किया , जाने तलाश कब ख़त्म हो
इन छोटी - छोटी चीजों को हर बार ढूँढने निकला हूँ ।
मैं गाँव में एक नशामुक्त परिवार ढूँढने निकला हूँ ।


                                                               प्रवेश




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